ईरान युद्ध से हिला वैश्विक ऊर्जा बाजार: युद्ध के बीच भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ कामयाब

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, ऐसे में संकट ने कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत ने बढ़ाया रूसी तेल आयात
इस संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। अमेरिका द्वारा अस्थायी छूट दिए जाने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में बड़ा इजाफा किया है। बताया जा रहा है कि भारतीय रिफाइनरियों ने महज एक हफ्ते के भीतर लगभग 3 करोड़ (30 मिलियन) बैरल रूसी तेल खरीद लिया है।
बीच समंदर से टैंकरों का यू-टर्न
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि रूस से चीन जा रहे कई बड़े टैंकरों ने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदल लिया।
‘Aqua Titan’ नामक अफ्रामैक्स टैंकर : पहले चीन के रिझाओ पोर्ट जा रहा था, अब 21 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंचने की उम्मीद,
‘Zouzou N’ नामक सुएज़मैक्स टैंकर : कजाखिस्तान का CPC ब्लेंड लेकर निकला, अब 25 मार्च तक सिक्का (गुजरात) पहुंच सकता है,
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी Vortexa Ltd. के अनुसार, कम से कम 7 टैंकर चीन से भारत की ओर मुड़ चुके हैं।









