मक्का: आज का सबसे पवित्र इस्लामी स्थल: इस्लाम से पहले अरब की धार्मिक परंपराओं की कहानी

आज मक्का को दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र शहर माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु हज और उमरा के लिए यहां पहुंचते हैं और काबा की परिक्रमा करते हैं।
लेकिन इतिहासकारों के अनुसार इस्लाम के आने से पहले मक्का का धार्मिक स्वरूप बिल्कुल अलग था। उस समय यह शहर अरब की विभिन्न जनजातियों का धार्मिक केंद्र था, जहां अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा होती थी।
इस्लाम से पहले का मक्का और 360 मूर्तियों की परंपरा
कई ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार इस्लाम से पहले काबा में लगभग 360 मूर्तियाँ रखी गई थीं। ये मूर्तियाँ अलग-अलग अरब जनजातियों के देवताओं का प्रतिनिधित्व करती थीं। मक्का उस समय धार्मिक और व्यापारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र था।
हुबल कौन था? प्राचीन अरब का प्रमुख देवता
इन देवताओं में सबसे प्रमुख देवता माना जाता था हुबल। कुछ ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार हुबल की मूर्ति काबा के अंदर स्थापित थी और उसे भाग्य तथा निर्णयों का देवता माना जाता था। कहा जाता है कि यह मूर्ति लाल पत्थर से बनी थी और जब उसका एक हाथ टूट गया तो उसकी जगह सोने का हाथ लगाया गया था। इससे अंदाजा लगाया जाता है कि उस समय हुबल को कितनी बड़ी धार्मिक मान्यता प्राप्त थी।
काबा में हुबल की मूर्ति और किस्मत के तीर
हुबल के सामने कुछ विशेष तीर रखे जाते थे। इन तीरों का उपयोग लोग अपने महत्वपूर्ण फैसलों के लिए करते थे।
जैसे – युद्ध करना चाहिए या नहीं, यात्रा या व्यापार का निर्णय, पारिवारिक मामलों के फैसले, इस प्रक्रिया को उस समय “किस्मत निकालना” माना जाता था।









