₹93 के पार फिसला रुपया: डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट

वैश्विक आर्थिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.24 तक गिर गया। यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले असर का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय हालात, विदेशी निवेशकों की निकासी और मजबूत डॉलर के कारण रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
रुपए की ताजा स्थिति: नया रिकॉर्ड लो
भारतीय रुपया पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है। कारोबारी सत्र के दौरान रुपया 93.24 तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। हालांकि बाद में इसमें हल्की रिकवरी देखने को मिली और यह 93.12 के आसपास कारोबार करता दिखा। दिन के अंत में रुपया 93.75 पर बंद हुआ, जो रिकॉर्ड क्लोजिंग लो है। यह स्पष्ट संकेत है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और रुपये पर दबाव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा।
रुपया क्यों गिर रहा है?
रुपये की गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है, जिसने भारत जैसे बड़े आयातक देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा भारी मात्रा में पैसा निकालना भी एक अहम वजह है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और मिडिल ईस्ट में बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव भी रुपये को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
तेल की कीमतों का असर
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर डॉलर की मांग को बढ़ाती है। इसका परिणाम यह होता है कि रुपया कमजोर हो जाता है और आयात महंगे हो जाते हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की निकासी
मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाल ली है। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी है। वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से दूरी बना रहे हैं। इस बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी से रुपये की स्थिति और कमजोर हुई है।






