रामनवमी 2026: सूर्य की किरणों से रामलला का ‘दिव्य तिलक’

रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या में एक बार फिर इतिहास रच दिया गया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप रामलला के ललाट पर सूर्य की किरणों से ‘सूर्य तिलक’ किया गया। यह अद्भुत और अलौकिक दृश्य ठीक दोपहर 12 बजे साकार हुआ, जिसने पूरे देश को भक्ति और गर्व से भावविभोर कर दिया।
सूर्य तिलक: आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम
रामलला के ‘सूर्य तिलक’ की यह परिकल्पना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी। इस अनूठी व्यवस्था में सूर्य की किरणों को विशेष तकनीकी और वास्तुशिल्पीय संयोजन के माध्यम से गर्भगृह तक पहुंचाया गया। ठीक 12:00 बजे से लगभग 4–5 मिनट तक सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर रहीं, इसके लिए आईना, लेंस और पाइप तकनीक का उपयोग किया गया, आयोजन से पहले 2–3 ट्रायल रन कर सटीकता सुनिश्चित की गई, यह परंपरा 19 वर्षों के चक्र पर आधारित है, जो इसे और भी विशेष बनाती है।
अयोध्या में रामजन्मोत्सव का भव्य उत्साह
रामनगरी अयोध्या में सुबह से ही भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। एक लाख से अधिक श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचे, पूरे शहर में LED स्क्रीन लगाई गईं, ताकि हर कोई सूर्य तिलक का साक्षी बन सके, मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और बधाई गान का आयोजन हुआ, साधु-संत और श्रद्धालु नृत्य और संगीत में झूम उठे,






