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भगवान शिव का रहस्यमयी स्वरूप: जानिए शिव पुराण की दो पौराणिक कथाएं

10 मार्च 2026
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जानिए शिव पुराण की दो पौराणिक कथाएं

देवों के देव महादेव भगवान शिव का स्वरूप जितना अद्भुत है, उतना ही रहस्यमय भी। उनके हाथ में त्रिशूल, गले में वासुकी नाग, जटाओं से बहती गंगा और शरीर पर भस्म — ये सभी उनके दिव्य स्वरूप की पहचान हैं।
लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में उठता है कि भगवान शिव बाघ की खाल क्यों पहनते हैं और उसी पर आसन लगाकर ध्यान क्यों करते हैं? पौराणिक ग्रंथों और शिव पुराण में इस रहस्य से जुड़ी कई रोचक कथाएं मिलती हैं। इन कथाओं में न केवल घटनाओं का वर्णन है बल्कि गहरे आध्यात्मिक संदेश भी छिपे हुए हैं।

शिव पुराण की कथा: जब ऋषियों ने शिवजी को मारने के लिए भेजा बाघ
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ब्रह्मांड का भ्रमण करते हुए एक घने जंगल में पहुंचे। उस जंगल में कई ऋषि-मुनि अपने परिवार के साथ रहते थे। उस समय भगवान शिव निर्वस्त्र अवस्था में थे और उन्हें इस बात का आभास भी नहीं था। जब ऋषियों की पत्नियों ने शिवजी के तेजस्वी और दिव्य रूप को देखा तो वे उनकी ओर आकर्षित हो गईं।

यह देखकर ऋषि-मुनि अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने सोचा कि इस अज्ञात व्यक्ति को सबक सिखाया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने शिवजी के रास्ते में एक गहरा गड्ढा बना दिया। जैसे ही शिवजी वहां से गुजरे, वे उस गड्ढे में गिर पड़े। इसके बाद ऋषियों ने एक भयंकर बाघ को भी उसी गड्ढे में छोड़ दिया ताकि वह शिवजी को मार दे। लेकिन हुआ इसके विपरीत।
भगवान शिव ने उस बाघ का वध कर दिया और उसकी खाल को अपने शरीर पर धारण कर लिया। जब शिवजी गड्ढे से बाहर आए तो ऋषि-मुनियों को समझ आ गया कि वे कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्वयं महादेव हैं। तभी से कहा जाता है कि भगवान शिव बाघ की खाल धारण करते हैं और उसी पर आसन लगाकर बैठते हैं।

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